संवादसेतु

मीडिया का आत्मावलोकन…

संपादकीय

संवादसेतु का यह अंक अल्पविराम के बाद आपके समक्ष है। मिशनरी मीडिया की आज भी यह नियति है। यही इसकी शक्ति भी है। जिन लोगों का इसे प्रारंभ करनें में प्रारंभिक प्रयास था उनके अपनी समस्याओं में उलझने के कारण इसके कुछ अंक प्रकाशित न हो सके। इसका श्रेय सुधी पाठकों को जाता है कि उन्होंने न केवल टोकना जारी रखा बल्कि संवादसेतु के पुनः प्रकाशन हेतु प्रेरित किया। परिणाम है कि नवोदित पत्रकारों की टोली नये सहयोगियों, नयी ऊर्जा तथा नये संकल्प के साथ पुनः आपके सामने है। बीते कुछ महीनों में मीडिया जगत यथावत ही चला है। वही खबरों की खींच-तान, वहीं बयानों पर छिड़ी रार और वही प्रेस कोंसिल अध्यक्ष काटजू का बड़बोलापन। प्रेस क्लब के चुनाव में वही पैनल दोबारा चुन लिया गया जो पिछली बार भी जीता था।

मीडिया सक्रियता की बात करें तो वह दो मुद्दों पर खास तौर पर दिखायी दी। पहली संजय दत्त की सजा पर और दूसरी नरेन्द्र मोदी के मामले में मीडिया के यू-टर्न पर। कुछ समय पहले तक मीडिया की आंखों की किरकिरी रहे नरेन्द्र मोदी संभावित केन्द्रीय भूमिका के चलते कथित नेशनल मीडिया के दुलारे बन गये हैं। प्रयाग का महाकुंभ इस बार काफी मीडिया फ्रेंडली रहा। उमड़ती भीड के बीच भी प्रशासन ने मीडिया की सुविधाओं का खास ख्याल रखा। विदेशी मीडिया भी कुंभ में काफी जुटा किंतु उनकी रिपोर्टिंग सतही ज्यादा नजर आयी। उसकी खास रुचि स्नान करती महिलायों और नागा सन्यासियों में अधिक रही है। वही दृश्य उनके फोटो-फीचर का विशेष आकर्षण हमेशा रहते हैं। इस बार की रिपोर्टिंग में कुम्भ की समीक्षा बाजार के रूप में भी काफी की गयी। कुम्भ की व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्चे और उसमें होने वाली बिक्री के गणित जुटाने के लिये पत्रकारों ने पिछले डेढ़ सौ वर्षों के सरकारी खाते खंगाल डाले।

इस सब से अलग, बहुत छोटे स्तर पर पत्रकारिता के विद्यार्थियों के गुण-संवर्ध्न हेतु कुछ गतिविधियां भी आयोजित हुईं। प्रभावी शीर्षक लेखन पर प्रेरणा, नोएडा में कार्यशाला का आयोजन किया गया तो दिल्ली मे माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय ने मीडिया शोध पर दो दिवसीय़ कार्यशाला का आयोजन किया। इसी बीच दिल्ली में पत्रकारों द्वारा प्रतिवर्ष वसंत पंचमी पर आयोजित होने वाले सरस्वती पूजन का भव्य आयोजन हुआ तो प्रेरणा में पत्रकारों का होली मिलन समारोह। दोनों ही कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे। इनका संक्षिप्त विवरण इस अंक में समाविष्ट है। संवादसेतु के इस अंक के कलेवर और विषयवस्तु पर आपकी टिप्पणी तथा आगामी अंक के लिये आपकी रचनाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

भारतीय नववर्ष की हार्दिक शुभकामना सहित,

आपका,

आशुतोष

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